कोविड के बीच खुले जिला के मंदिरों के कपाट

Published by Razak Mohammad on

सोलन में कोरोना के बीच खुले एशिया के सबसे ऊंचे जटोली मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचे लोग। संवाद
– फोटो : SOLAN

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सोलन। सरकार के आदेशानुसार वीरवार को धार्मिक स्थलों के कपाट खुल गए हैं। साढे़ पांच महीने से बंद पड़े कपाट खुलने से लोगों ने मंदिरों में जाकर पूजा अर्चना करनी शुरू की, लेकिन पहले दिन मंदिरों में ज्यादा भीड़ नहीं दिखी।
शहर के ऐतिहासिक मां शूलिनी मंदिर को सुबह 6 बजे लोगों की सुविधा के लिए खोला गया, सुबह से ही लोग आना शुरू हो गए। मंदिर में होम गार्ड को तैनात करने के साथ थर्मल स्कैनिंग करने के बाद ही लोगों को प्रवेश करने दिया गया। हालांकि मंदिरों में आने से पूर्व लोग अपनी सुरक्षा को लेकर भी सजग दिखाई दिए। मास्क और सैनिटाइजर का प्रयोग करते रहे। वहीं, शहर के दूसरे ऐतिहासिक जटोली मंदिर में भी लोगों की आवाजाही पहले दिन कम रही। पहले के मुकाबले लोगों की भीड़ नहीं पहुंची। कोविड के कारण लोग अभी तक घरों से कम निकल रहे हैं। मंदिरों के साथ प्रसाद की दुकानों पर भी बिक्री न के बराबर ही रही। शूलिनी मंदिर के पुजारी रामस्वरूप शर्मा ने कहा कि लोग मंदिर के कपाट खुलने के बाद भी कम संख्या में आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले दिन मंदिर में रौनक कम रही। देर शाम तक लगभग 100 लोगों ने मंदिर में माथा टेका।

सोलन। सरकार के आदेशानुसार वीरवार को धार्मिक स्थलों के कपाट खुल गए हैं। साढे़ पांच महीने से बंद पड़े कपाट खुलने से लोगों ने मंदिरों में जाकर पूजा अर्चना करनी शुरू की, लेकिन पहले दिन मंदिरों में ज्यादा भीड़ नहीं दिखी।

शहर के ऐतिहासिक मां शूलिनी मंदिर को सुबह 6 बजे लोगों की सुविधा के लिए खोला गया, सुबह से ही लोग आना शुरू हो गए। मंदिर में होम गार्ड को तैनात करने के साथ थर्मल स्कैनिंग करने के बाद ही लोगों को प्रवेश करने दिया गया। हालांकि मंदिरों में आने से पूर्व लोग अपनी सुरक्षा को लेकर भी सजग दिखाई दिए। मास्क और सैनिटाइजर का प्रयोग करते रहे। वहीं, शहर के दूसरे ऐतिहासिक जटोली मंदिर में भी लोगों की आवाजाही पहले दिन कम रही। पहले के मुकाबले लोगों की भीड़ नहीं पहुंची। कोविड के कारण लोग अभी तक घरों से कम निकल रहे हैं। मंदिरों के साथ प्रसाद की दुकानों पर भी बिक्री न के बराबर ही रही। शूलिनी मंदिर के पुजारी रामस्वरूप शर्मा ने कहा कि लोग मंदिर के कपाट खुलने के बाद भी कम संख्या में आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले दिन मंदिर में रौनक कम रही। देर शाम तक लगभग 100 लोगों ने मंदिर में माथा टेका।

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