कोरोना मृतकों के अंतिम संस्कार के लिए मुफ्त लकड़ी देंगे वन निगम

Shimla News


अमर उजाला नेटवर्क, शिमला

द्वारा प्रकाशित: अरविंद ठाकुर
Updated Mon, 03 मई 2021 03:09 AM IST

सांकेतिक चित्र
– फोटो: अमर उजाला

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हिमाचल प्रदेश में को विभाजित संक्रमण के फैलने के साथ ही अब मृतकों की संख्या में लगातार इजाफा होता रहा है। परिस्थिति यह हैं कि शवों के अंतिम संस्कार के लिए जगह से लेकर लकड़ी तक का संकट खड़ा होने लगा है। यह देखता है कि अब राज्य वन विकास निगम ने कोरोना मृतकों के अंतिम संस्कार प्रदान करने वाली एजेंसियों को मुक्त में लकड़ी मुहैया कराने का फैसला लिया। वन मंत्री राकेश पठानिया ने निगम के सभी डिपो को स्टैंडबाय कर दिया है।

निर्देश दिए गए हैं कि वह वर्तमान में डिपो में मौजूद लकड़ी की बिक्री न करें। साथ ही जरूरत पड़ने पर वन भूमि को अंतिम संस्कार के लिए उपयोग में लाने के लिए अनुमतिजत देने भी कह दिया गया है। इस क्रम में शिमला में पहले ही कनलोग में वन भूमि को जेसीबी लगाकर स्वच्छ बनाया जा रहा है। हालांकि, यह स्पष्ट किया गया है कि वन भूमि पर शेड्स नहीं बनाए जा सकते, लेकिन शवों के अंतिम संस्कार के लिए वन विभाग की जमीन व लकड़ी मुहैया किए जाएंगे।

बता दें, प्रदेश में कोरोना से तकरीबन हर रोज 25 से 30 लोगों की मौत हो रही है। चूंकि इन शवों का को विभाजित कार्याल के तहत ही अंतिम संस्कार किया जा सकता है। ऐसी में बड़ी संख्या में शवों के आने से संस्कार के लिए जगह मिलने में मुश्किल आने लगी थी।

हिमाचल प्रदेश में को विभाजित संक्रमण के फैलने के साथ ही अब मृतकों की संख्या में लगातार इजाफा होता रहा है। परिस्थिति यह हैं कि शवों के अंतिम संस्कार के लिए जगह से लेकर लकड़ी तक का संकट खड़ा होने लगा है। यह देखता है कि अब राज्य वन विकास निगम ने कोरोना मृतकों के अंतिम संस्कार प्रदान करने वाली एजेंसियों को मुक्त में लकड़ी मुहैया कराने का फैसला लिया। वन मंत्री राकेश पठानिया ने निगम के सभी डिपो को स्टैंडबाय कर दिया है।

निर्देश दिए गए हैं कि वह वर्तमान में डिपो में मौजूद लकड़ी की बिक्री न करें। साथ ही जरूरत पड़ने पर वन भूमि को अंतिम संस्कार के लिए उपयोग में लाने के लिए अनुमतिजत देने भी कह दिया गया है। इस क्रम में शिमला में पहले ही कनलोग में वन भूमि को जेसीबी लगाकर स्वच्छ बनाया जा रहा है। हालांकि, यह स्पष्ट किया गया है कि वन भूमि पर शेड्स नहीं बनाए जा सकते, लेकिन शवों के अंतिम संस्कार के लिए वन विभाग की जमीन व लकड़ी मुहैया किए जाएंगे।

बता दें, प्रदेश में कोरोना से तकरीबन हर रोज 25 से 30 लोगों की मौत हो रही है। चूंकि इन शवों का को विभाजित कार्याल के तहत ही अंतिम संस्कार किया जा सकता है। ऐसी में बड़ी संख्या में शवों के आने से संस्कार के लिए जगह मिलने में मुश्किल आने लगी थी।





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