कोरोना के बीच जिले में गूंजी सुंदर मुंदरिये हो, तेरा कौन बेचारा हो….

Published by Razak Mohammad on

हमीरपुर बाजार में लोहड़ी पर्व पर बैंड बाजे बजाकर बधाइयां देते हुए।

हमीरपुर बाजार में लोहड़ी पर्व पर बैंड बाजे बजाकर बधाइयां देते हुए।
– फोटो : Hamirpur-HP

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हमीरपुर। कोरोना के बीच जिलाभर में उत्तरी भारत का प्रसिद्ध लोहड़ी पर्व धूमधाम से मनाया गया। बुधवार शाम को बच्चों ने घर-घर जाकर सुंदरिये नी मुंदरिये, तेरा कौन बेचारा हो आदि गीत गाकर लोहड़ी मांगी। वहीं, दिन में लोगों ने बाजार में भी खूब खरीदारी की। लोगों ने दुकानों से मूंगफली, रेवड़ियां, गज्जक , चिड़वे, तिल, शक्कर, मिठाइयों की खूब खरीदारी की। ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे बच्चों ने लोहड़ी गीत सुनाकर लोगों का मनोरंजन किया।
लोगों ने भी बच्चों को खूब मिठाइयां व रुपये बांटे। लोहड़ी पर्व के एक सप्ताह पहले ही बच्चे लोहड़ी गाना शुरू कर देते हैं और 13 जनवरी तक लोहड़ियां गाते हैं। इस दौरान बच्चों ने अलग-अलग दल बनाकर लोहड़ी गीत सुनाए। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों ने अपने अपने घर में अंगीठियां जलाईं और आग सेंकी। रात को लोगों ने एक दूसरे को मिठाइयां बांटीं और स्थानीय पकवान तिलचौली बांटी। वहीं, 14 जनवरी को मकर संक्रांति का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन लोग घरों में उड़द की दाल की खिचड़ी बनाकर खाते हैं और पतंग उड़ाते हैं। वहीं, पवित्र स्थानों पर स्नान करते हैं। कहते हैं कि दक्ष प्रजापति की पुत्री सती के दहन की याद में यह अंगीठे जलाए जाते हैं। इस अवसर पर विवाहिता पुत्रियों को मिठाई, रेवड़ी, फल आदि भेजे गए।
लोहड़ी को दुल्ला भट्टी की एक कहानी से भी जोड़ा जाता है। दुल्ला भट्टी मुगल शासक अकबर के समय में पंजाब में रहता था। उसे पंजाब के नायक की उपाधि से सम्मानित किया गया था। दुल्ला भट्टी ने एक योजना के तहत गुलाम लड़कियों को मुक्त करवाया और उनकी शादी हिंदू लड़कों से करवाई और उनकी शादी की सभी व्यवस्था भी करवाई। वहीं, यह त्योहार पतझड़ ऋतु के आने के द्योतक के रूप में मनाया जाता है। स्थानीय लोगों सुखदेव शर्मा, संजय शर्मा, परमजीत, विनय कुमार, तृप्ता देवी, रेखा कुमारी, नीतू देवी, प्रदीप कुमार, बीना शर्मा आदि ने कहा कि लोहड़ी का पर्व बड़ी ही धूमधाम से मनाया गया। उन्होंने सभी प्रदेश वासियों को मकर संक्रांति की भी शुभकामनाएं दीं।

हमीरपुर। कोरोना के बीच जिलाभर में उत्तरी भारत का प्रसिद्ध लोहड़ी पर्व धूमधाम से मनाया गया। बुधवार शाम को बच्चों ने घर-घर जाकर सुंदरिये नी मुंदरिये, तेरा कौन बेचारा हो आदि गीत गाकर लोहड़ी मांगी। वहीं, दिन में लोगों ने बाजार में भी खूब खरीदारी की। लोगों ने दुकानों से मूंगफली, रेवड़ियां, गज्जक , चिड़वे, तिल, शक्कर, मिठाइयों की खूब खरीदारी की। ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे बच्चों ने लोहड़ी गीत सुनाकर लोगों का मनोरंजन किया।

लोगों ने भी बच्चों को खूब मिठाइयां व रुपये बांटे। लोहड़ी पर्व के एक सप्ताह पहले ही बच्चे लोहड़ी गाना शुरू कर देते हैं और 13 जनवरी तक लोहड़ियां गाते हैं। इस दौरान बच्चों ने अलग-अलग दल बनाकर लोहड़ी गीत सुनाए। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों ने अपने अपने घर में अंगीठियां जलाईं और आग सेंकी। रात को लोगों ने एक दूसरे को मिठाइयां बांटीं और स्थानीय पकवान तिलचौली बांटी। वहीं, 14 जनवरी को मकर संक्रांति का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन लोग घरों में उड़द की दाल की खिचड़ी बनाकर खाते हैं और पतंग उड़ाते हैं। वहीं, पवित्र स्थानों पर स्नान करते हैं। कहते हैं कि दक्ष प्रजापति की पुत्री सती के दहन की याद में यह अंगीठे जलाए जाते हैं। इस अवसर पर विवाहिता पुत्रियों को मिठाई, रेवड़ी, फल आदि भेजे गए।

लोहड़ी को दुल्ला भट्टी की एक कहानी से भी जोड़ा जाता है। दुल्ला भट्टी मुगल शासक अकबर के समय में पंजाब में रहता था। उसे पंजाब के नायक की उपाधि से सम्मानित किया गया था। दुल्ला भट्टी ने एक योजना के तहत गुलाम लड़कियों को मुक्त करवाया और उनकी शादी हिंदू लड़कों से करवाई और उनकी शादी की सभी व्यवस्था भी करवाई। वहीं, यह त्योहार पतझड़ ऋतु के आने के द्योतक के रूप में मनाया जाता है। स्थानीय लोगों सुखदेव शर्मा, संजय शर्मा, परमजीत, विनय कुमार, तृप्ता देवी, रेखा कुमारी, नीतू देवी, प्रदीप कुमार, बीना शर्मा आदि ने कहा कि लोहड़ी का पर्व बड़ी ही धूमधाम से मनाया गया। उन्होंने सभी प्रदेश वासियों को मकर संक्रांति की भी शुभकामनाएं दीं।

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