कोरोना: ऑक्सीजन लेने निकले समंदर के सिपाही! नेवी ने जंगी जहाजों को मोर्चा संभाला

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भारतीय नौसेना अपने रक्षा उपकरण खुद बनाने की ओर कदम बढ़ा चुकी है- सांकेतिक फोटो (पिक्साबे)

ऑक्सीजन संकट: ऑपरेशन समुद्र सेतु 2 के तहत भारतीय नौसेना के जंगी जहाज विदेशों से लिक्विड ऑक्सीजन कंटेनर को स्वदेश लाने में मदद करेंगे।

नई दिल्ली। भारतीय नौसेना ने कोरोना के खिलाफ लड़ाई में पहले ही अपने अस्पताल, डॉ और मेडिकल स्टाफ झोंक दिए हैं और अब जंगी जहाजों ने भी मोर्चा संभाल लिया है। देश में मेडिकल ऑक्सीजन की कमी को खत्म करने के लिए भारतीय नौसेना ने विदेशों से ऑक्सीजन कंटेनर लाने के लिए वर्तमान में 7 जहाजों को तैनात किया है। पहले चरण में नौसेना ने आईसीसी कल, आईंटवर्ल्ड, आईन्ट्स जलावेश, आईन्ट्स ऐरावत को तैनात किया था। वहीं दूसरे चरण में आईंट कोच्चि, आइंट त्रिखंड और आईट्स तबर को तैनात किया गया है। नौसेना ने पिछले साल कोरोना महामारी को देखते हुए भारत सरकार के वंदे भारत मिशन के तहत ऑपरेशन समुद्र सेतु शुरू किया था, जिसके तहत मालदीव, श्रीलंका और ईरान में फंसे लगभग 4000 भारतीयों को स्वदेश वापस लाया गया था। अब वर्ष 2021 में ऑक्सीजन कंटेनर और मेडिकल सामग्री भारत लाने के लिए नौसेना ने ऑपरेशन समुद्र सेतु शुरू किया है। बता दें कि आईसीसी कल और आईंसफोर्ड मिशन के तहत फारस की खाड़ी में तैनात थे, जिनके पहले चरण में 30 अप्रैल को सप्लाई लाने के लिए अलग-अलग देशों में भेजा गया था। इक्त्या तलवार को बहरीन के मनामा पोर्ट तो आईतों कल को दोहा, कतर की ओर प्रस्थान किया गया। बहरीन से आईन्टवर्ल्ड 40 टन टन लिक्विड ऑक्सीजन के बारे में मुंबई के लिए प्रस्थान हो चुका है। समान आयतों के पहले दोहा से चिकित्सा सामग्री उठाएगा और उसके बाद कुवैत से लिक्विड ऑक्सीजन सिलेंडर के बारे में भारत की तरफ से होगा। इसी क्रम में आईन्ट्स ऐरावत को भी डायवर्ट किया गया है, तो आइन्ट्स जलावेश को मेंटिनेंस से निकालकर ऑपरेशन में तैनात किया गया है। बता दें कि ये आईन्ट्स जलावेश ही है, जिसने ऑपरेशन समुद्र सेतु में सबसे महत्वपूर्ण रोल प्लेया था। आईन्ट्स ऐरावत सिंगापुर से लिक्विड ऑक्सीजन के कंटेनर के बारे में भारत लौटेगा तो वही आईरीज जलावेश को स्टैंडबाय पर रखा गया है, जैसे ही सरकार की तरफ से आदेश होगा। जंगी जहाज तुरंत मिशन के लिए रवाना होगा.नौसे ने दूसरे पट्टी के तहत अरब सागर में मिशन तैनाती के तहत आईंट कोच्चि, त्रिखंड और तबर को भी तुरंत ऑपरेशन का हिस्सा बनाया है। यही नहीं दक्षिणी नौसेना कमान ने अपने नायक शिपटैंक आईतों श्रदुल को भी तैयार रखा है और महज 48 घंटे के भीतर कभी भी इसका इस्तेमाल किया जा सकेगा। नौसेना के अनुसार उन्हें गिरने पर और भी जंगी जहाजों को इस ऑपरेशन में तैनात किया जाएगा। हालांकि कोरोना के मुताबिक सभी कार्रवाई सुरक्षित रूप से चल रही है। दरअसल इन जंगी जहाजों को लिक्विड ऑक्सीजन कंटेनर और मेडिकल सप्लाई के लिए दूसरे देश जाना है, ऐसे में कोरोना गाइडलाइंस का सख्ती से पालन किया जा रहा है। देश पर जब भी संकट आया है, नौसेना ने समुद्री सीमाओं की सुरक्षा के साथ जनता का साथ निभाया है। समंदर के सिपाही एक बार फिर अपनी फर्ज अदा करने निकल पड़े हैं …








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