केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह बोले- डोमिसाइल कानून से नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस को ही खतरा

Published by Razak Mohammad on


न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Updated Mon, 29 Jun 2020 06:05 PM IST

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह
– फोटो : ANI

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर Free में
कहीं भी, कभी भी।

70 वर्षों से करोड़ों पाठकों की पसंद

ख़बर सुनें

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कांग्रेस और नेशनल कांफ्रेंस (नेकां) पर निशाना साधते हुए कहा कि यह दोनों दल नए डोमिसाइल कानून से परेशान हो गए हैं। उन्होंने कहा जब इन पार्टियों के नेता कहते हैं कि डोमिसाइल कानून से जम्मू-कश्मीर के लोगों को खतरा हैं तो इसका मतलब यह है कि इन पार्टियों के नेताओं को खतरा है। 

यह भी पढ़ेंः त्राल के बाद डोडा हुआ आतंक मुक्त, जानिए 1999 से 2019 तक जम्मू-कश्मीर में कब-कब हुए आतंकी हमले

नेकां अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला का नाम लिए बिना सिंह ने कहा कि एक लोकसभा सांसद डोमिसाइल कानून का विरोध कर रहे हैं और इसे अवैध बता रहे हैं, जबकि सच्चाई यह है कि वह भी उस संसद के सदस्य हैं जहां यह कानून पारित हुआ है। ऐसे में पहले उन्हें संसद की सदस्यता से इस्तीफा देना चाहिए और फिर कानून का विरोध करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि जो लोग कानून को अवैध बता रहे हैं, उन्हें पहले यह बताना चाहिए कि पश्चिमी पाकिस्तान के रिफ्यूजियों, वाल्मीकि समाज के लोगों और गोरखा वर्ग के लोगों को 73 साल तक वोट देने के अधिकार से वंचित क्यों रखा। 

उन्होंने कहा कि नेकां व कांग्रेस को अगर अपनी बात पर विश्वास है तो वह आगामी विधानसभा चुनाव में इसे मुद्दा बनाए और लोगों से कहे कि अगर वह चुनाव जीते तो अनुच्छेद 370 बहाल करेंगे। केवल विरासती सत्ता व राजनीतिक वर्चस्व को कायम रखने के लिए यह लोगों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कांग्रेस और नेशनल कांफ्रेंस (नेकां) पर निशाना साधते हुए कहा कि यह दोनों दल नए डोमिसाइल कानून से परेशान हो गए हैं। उन्होंने कहा जब इन पार्टियों के नेता कहते हैं कि डोमिसाइल कानून से जम्मू-कश्मीर के लोगों को खतरा हैं तो इसका मतलब यह है कि इन पार्टियों के नेताओं को खतरा है। 

यह भी पढ़ेंः त्राल के बाद डोडा हुआ आतंक मुक्त, जानिए 1999 से 2019 तक जम्मू-कश्मीर में कब-कब हुए आतंकी हमले

नेकां अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला का नाम लिए बिना सिंह ने कहा कि एक लोकसभा सांसद डोमिसाइल कानून का विरोध कर रहे हैं और इसे अवैध बता रहे हैं, जबकि सच्चाई यह है कि वह भी उस संसद के सदस्य हैं जहां यह कानून पारित हुआ है। ऐसे में पहले उन्हें संसद की सदस्यता से इस्तीफा देना चाहिए और फिर कानून का विरोध करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि जो लोग कानून को अवैध बता रहे हैं, उन्हें पहले यह बताना चाहिए कि पश्चिमी पाकिस्तान के रिफ्यूजियों, वाल्मीकि समाज के लोगों और गोरखा वर्ग के लोगों को 73 साल तक वोट देने के अधिकार से वंचित क्यों रखा। 

उन्होंने कहा कि नेकां व कांग्रेस को अगर अपनी बात पर विश्वास है तो वह आगामी विधानसभा चुनाव में इसे मुद्दा बनाए और लोगों से कहे कि अगर वह चुनाव जीते तो अनुच्छेद 370 बहाल करेंगे। केवल विरासती सत्ता व राजनीतिक वर्चस्व को कायम रखने के लिए यह लोगों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।

Source link


0 Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *