कृषि अध्यादेश संसद में पेश, अकाली दल का झूठा चेहरा आया सामने: कैप्टन अमरिंदर सिंह

Published by Razak Mohammad on

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

Updated Wed, 16 Sep 2020 01:18 AM IST

कैप्टन अमरिंदर सिंह (फाइल फोटो)
– फोटो : एएनआई

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संसद में कृषि अध्यादेश पहले ही पेश करने पर पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह शिरोमणि अकाली दल और आम आदमी पार्टी पर जमकर बरसे। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के किसानों के सामने शिअद और अन्य राजनीतिक दलों की सच्चाई सामने आ चुकी है। अकाली नेता इस मुद्दे पर ड्रामेबाजी कर रहे थे।

कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि वास्तविकता यह है कि जब यह अध्यादेश संसद में कानून बनाने के लिए पेश हुआ तब सुखबीर बादल सदन से बाहर थे। इससे सिद्ध होता है कि अकाली दल प्रधान किसान जत्थेबंदियों को छलने के लिए सारा नाटक कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे साफ झलकता है कि किसानों और राज्यों के हितों को अनदेखा करते हुए साजिश रची गई, जबकि कृषि संविधान के अनुसार राज्यों की जिम्मेदारी है। 

मुख्यमंत्री ने हरपाल सिंह चीमा और अमन अरोड़ा की ओर से कृषि अध्यादेशों में कांग्रेस और अकाली-भाजपा के बीच सांठगांठ के आरोप लगाने के बयान को हास्यास्पद करार देते हुए कहा कि आप नेताओं को अपना मुंह खोलने से पहले तथ्यों की जांच कर लेनी चाहिए। राज्य सरकार की आलोचना करने की जल्दबाजी में ‘आप’ सच्चाई को जाने बिना बेसिर-पैर बयान दागने की आदत का शिकार हो चुकी है।

मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री रावसाहेब पाटिल दानवे से संसद में कृषि अध्यादेशों संबंधी देश को भ्रामक जानकारी देने के मुद्दे पर बिना शर्त माफी की मांग की है। मुख्यमंत्री ने इसको संसदीय मर्यादा और असूलों का उल्लंघन करार दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी समय उच्चस्तरीय कमेटी ने ऐसा कोई भी सुझाव नहीं दिया जिसके अनुसार इन किसान विरोधी अध्यादेशों के प्रति हामी भरी गई हो।

खेती अध्यादेश के खिलाफ वोट डालेंगे सांसद ढींढसा 

पूर्व वित्त मंत्री परमिंदर सिंह ढींढसा ने कहा कि सांसद सुखदेव ढींढसा के नेतृत्व वाले अकाली दल का कदम स्पष्ट है। केंद्र सरकार के तीनों खेती अध्यादेश किसानों के उलट हैं। इनका हर स्तर पर विरोध किया जाएगा। दिल्ली से फोन पर बात करते हुए परमिंदर ने कहा कि उनके पिता सांसद ढींढसा इस अध्यादेश के खिलाफ संसद में वोट डालेंगे।

मंगलवार को तीसरी बार कोरोना टेस्ट के लिए सांसद ढींढसा का सैंपल लिया गया है। पूरी उम्मीद है कि बुधवार को आने वाली रिपोर्ट निगेटिव आएगी। ढींढसा ने कहा कि किसानों से संबंधित इस मामले में केंद्र की जल्दबाजी भी कई तरह के संदेह पैदा कर रही है। बिल लाने से पहले किसान संगठनों की राय नहीं ली गई और न ही राज्यों से बातचीत की गई। 

सांसद एवं पूर्व केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री परनीत कौर ने एनडीए सरकार की ओर से जारी अध्यादेशों का विरोध किया है। परनीत ने कहा कि वह संसद सत्र में शामिल नहीं हो सकीं क्योंकि वह कोरोना पॉजिटिव लोगों के संपर्क में आने के कारण एकांतवास में हैं। वह एकांतवास का समय पूरा होने पर संसद में जाकर इन अध्यादेशों का विरोध करेंगी। 

परनीत ने कहा कि वह और उनकी पार्टी किसानों के हितों के लिए काम करने और उन्हें सुरक्षित करने को वचनबद्ध है। केंद्र इन किसान विरोधी अध्यादेशों को पास करने के लिए संसद में अपने पूर्ण बहुमत का प्रयोग करेगी तो भी उनकी पार्टी इन्हें कानून बनने से रोकने के लिए अन्य कानूनी विकल्प की तलाश करेगी। 

संसद में कृषि अध्यादेशों के खिलाफ वोट करेगी आप

आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के अध्यक्ष व सांसद भगवंत मान ने तीनों कृषि अध्यादेशों को कृषि और किसानों के लिए घातक बताया है। मान ने कहा कि आप संसद के भीतर और बाहर इनका विरोध करेगी। बुधवार को संसद में आप इसके खिलाफ अपना वोट करेगी और पंजाब में बादलों के घर तक ट्रैक्टर मार्च से रोष प्रदर्शन करेगी। 

सार

  • मुख्यमंत्री बोले- सुखबीर को पता था संसद में पेश होगा अध्यादेश, इसलिए रहे बाहर 
  • आप विधायकों को मुख्यमंत्री ने बोलने से पहले तथ्यों की जांच करने की दी सलाह

विस्तार

संसद में कृषि अध्यादेश पहले ही पेश करने पर पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह शिरोमणि अकाली दल और आम आदमी पार्टी पर जमकर बरसे। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के किसानों के सामने शिअद और अन्य राजनीतिक दलों की सच्चाई सामने आ चुकी है। अकाली नेता इस मुद्दे पर ड्रामेबाजी कर रहे थे।

कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि वास्तविकता यह है कि जब यह अध्यादेश संसद में कानून बनाने के लिए पेश हुआ तब सुखबीर बादल सदन से बाहर थे। इससे सिद्ध होता है कि अकाली दल प्रधान किसान जत्थेबंदियों को छलने के लिए सारा नाटक कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे साफ झलकता है कि किसानों और राज्यों के हितों को अनदेखा करते हुए साजिश रची गई, जबकि कृषि संविधान के अनुसार राज्यों की जिम्मेदारी है। 

मुख्यमंत्री ने हरपाल सिंह चीमा और अमन अरोड़ा की ओर से कृषि अध्यादेशों में कांग्रेस और अकाली-भाजपा के बीच सांठगांठ के आरोप लगाने के बयान को हास्यास्पद करार देते हुए कहा कि आप नेताओं को अपना मुंह खोलने से पहले तथ्यों की जांच कर लेनी चाहिए। राज्य सरकार की आलोचना करने की जल्दबाजी में ‘आप’ सच्चाई को जाने बिना बेसिर-पैर बयान दागने की आदत का शिकार हो चुकी है।


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