किसान आंदोलन से पीएम मोदी की छवि को लगा झटका, इमेज बनाने में जुटी सरकार, संघ और भाजपा

Published by Razak Mohammad on

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ब्रांडिंग पर भरोसा करने वाली मोदी सरकार के लिए किसान आंदोलन किसी झटके से कम नहीं है। राजधानी में लंबे समय से चल रहे किसान आंदोलन का सीधा असर पीएम मोदी की छवि पर पड़ रहा है। सरकार और संगठनों ने भी इसे भांप लिया है। दिल्ली सीमा से भले ही आंदोलनकारी किसान नहीं हटे हों, लेकिन सरकार की छवि पर लगे दाग हटाने की कोशिशें शुरू हो चुकी हैं। मंत्रियों से लेकर भाजपा की प्रदेश सरकारें तक और पार्टी से लेकर आरएसएस तक मोदी सरकार की छवि चमकाने और ब्रांडिंग की मुहिम शुरू करने में लग गए हैं।

किसानों से बात कर रहे हैं भाजपा सांसद, विधायक और पार्षद

एक तरफ जहां केंद्र सरकार किसान संगठनों से चर्चा कर रही है वहीं दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी ने भी नए किसान विधेयक के फायदों को लोगों तक पहुंचाने के लिए मैदान संभाल लिया है। पार्टी ने ‘अन्नदाता के हितों को समर्पित मोदी सरकार’ शीर्षक से हिंदी, अंग्रेजी समेत अन्य भाषाओं में बुकलेट छपवाई है।

सौ पृष्ठों की पुस्तक में विस्तार से बताया गया है कि नए कृषि कानूनों से किस तरह से किसानों को फायदा होगा। किताब में कृषि कानूनों को लेकर उठ रहे सवाल और आशंकाओं के बारे में भी जवाब दिया गया है। पार्टी ने सोशल मीडिया पर भी कैंपेन शुरू कर दिया है। सभी सांसदों, विधायकों और पार्षदों की ड्यूटी भी लगाई गई है कि वे उन किसान संगठनों की सूची तैयार करें जो समर्थन देने के लिए तैयार हैं।

भाजपा के एक वरिष्ठ उपाध्यक्ष ने नाम न छापने के अनुरोध पर अमर उजाला को बताया कि पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा रोज राज्यों में हो रही किसान बैठकों और किसान रैलियों का अपडेट ले रहे हैं। हर शहर में नए कृषि कानूनों के समर्थन में एक से दो किसान रैली आयोजित करने के लिए कहा गया है। भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री, सांसदों, विधायकों को किसानों के बीच जाने और उनसे चर्चा करने के लिए भी कहा गया है। भाजपा किसान मोर्चा भी पूरे देश में किसान संगठनों से चर्चा में जुटा हुआ है।

भाजपा के राष्ट्रीय सचिव और पूर्व सांसद अनुपम हाजरा ने अमर उजाला को बताया कि ब्लॉक स्तर पर कार्यकर्ता सीधे जाकर किसानों से नए कानूनों को लेकर चर्चा कर रहे हैं। पार्टी के हर राज्य के सांसद विधायक और मंत्री भी सप्ताह में तीन से चार दिन अपने क्षेत्र के किसान और उनके संगठनों के साथ बैठक कर रहे हैं। सामान्य भाषा में तैयार की गई पुस्तिका भी लोगों में वितरित की जा रही है। विपक्ष लगातार जिन मुद्दों को लेकर किसानों को भड़का रहा है, ऐसे विषयों पर भी हम किसानों से चर्चा कर रहे हैं। उन्हें बता रहे हैं कि विपक्ष उनका गलत इस्तेमाल कर रहा है।’

26 जनवरी से आरएसएस हर गांवों में संभालेगा मोर्चा  

सरकार और भाजपा का साथ देने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ा संगठन भारतीय किसान संघ भी मैदान में उतर गया है। किसान संघ के कार्यकर्ता 26 जनवरी में देश के हर गांव में किसानों को जागरूक करने का काम शुरु करेंगे। संघ के महामंत्री बद्रीनारायण चौधरी ने अमर उजाला से कहा कि किसान संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में नए किसान कानूनों को लेकर गांवों के किसानों के बीच जाने का फैसला लिया है।

संघ के करीब एक लाख कार्यकर्ता 26 जनवरी को 50 हजार गांव कवर करेंगे और किसानों से बात करेंगे। दो-दो कार्यकर्ता एक-एक ग्राम समितियों में जाकर नए कानूनों को लेकर बताएंगे। ये सभी लोग नए किसान कानूनों को लेकर एक छोटी पुस्तिका भी वितरित करेंगे, जिसमें कानूनों के फायदों के बारें में जानकारी दी गई होगी। इसके अलावा गांव में छोटी-छोटी संगोष्ठी भी आयोजित करेंगे।

चौधरी ने बताया कि केंद्र सरकार ने किसानों की मांगों को लेकर विशेषज्ञों की जो समिति बनाने की बात कही है हम उसका स्वागत करते हैं। सरकार यह सुनिश्चित करे कि किसानों को फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य मिले। जो भी व्यापारी किसानों से सीधे उनके उत्पाद खरीदे वह एमएसपी से कम न हो।

इसके अलावा व्यापारियों के रजिस्ट्रेशन का भी प्रावधान हो। इसके अलावा हमारी मांग है कि सरकार केंद्र या राज्य के स्तर पर पोर्टल तैयार करे और ट्रेडर्स उसमें बैंक की गारंटी के साथ अपना पंजीयन करवाएं। इससे किसान ये देख सकेगा कि जो खरीद करने आया है वह सही है या गलत। इसके साथ साथ ही हर जिले में कृषि अदालत बनाई जाए।

किसानों को थकाने, माहौल बदलने और समर्थन जुटाने में लगी सरकार

आंदोलन की शुरुआत में केंद्र सरकार बैकफुट पर थी, लेकिन अब फ्रंटफुट पर आकर आक्रामक रुख अपना रही है। पीएम नरेंद्र मोदी और सरकार की इमेज को बचाने के लिए केंद्रीय मंत्रियों ने भी मोर्चा संभाला लिया है। सरकार द्वारा इस मुद्दे को किसान बनाम किसान किया जा रहा है। जो लोग आंदोलन कर रहे हैं उन्हें इंतजार कराकर थकाने और उनके सामने कानून का समर्थन करने वालों की बड़ी फौज तैयार की योजना बनाई गई है। इसी दिशा में केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर रोज एक दर्जन से ज्यादा किसान संगठनों से मुलाकात कर रहे हैं।

वहीं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी किसानों के साथ होने वाली हर बैठक पर नजर बनाए हुए हैं। छठवें दौर की बातचीत के बाद से ही सरकार ने माहौल बदलने पर जोर देना शुरू कर दिया है। अधिकांश केंद्रीय मंत्री शहरों में जाकर नए कानूनों को लेकर प्रेसवार्ता कर रहे हैं। सभी मंत्री अपने सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए नए कृषि कानूनों के फायदे बता रहे हैं। कृषि कानूनों के फायदे वाले और माहौल बदलने के लिए अलग-अलग भाषाओं में वीडियो सोशल मीडिया पर जारी किए जा रहे हैं।

सार

सौ पृष्ठों की पुस्तक में विस्तार से बताया गया है कि नए कृषि कानूनों से किस तरह से किसानों को फायदा होगा। किताब में कृषि कानूनों को लेकर उठ रहे सवाल और आशंकाओं के बारे में भी जवाब दिया गया है…

विस्तार

ब्रांडिंग पर भरोसा करने वाली मोदी सरकार के लिए किसान आंदोलन किसी झटके से कम नहीं है। राजधानी में लंबे समय से चल रहे किसान आंदोलन का सीधा असर पीएम मोदी की छवि पर पड़ रहा है। सरकार और संगठनों ने भी इसे भांप लिया है। दिल्ली सीमा से भले ही आंदोलनकारी किसान नहीं हटे हों, लेकिन सरकार की छवि पर लगे दाग हटाने की कोशिशें शुरू हो चुकी हैं। मंत्रियों से लेकर भाजपा की प्रदेश सरकारें तक और पार्टी से लेकर आरएसएस तक मोदी सरकार की छवि चमकाने और ब्रांडिंग की मुहिम शुरू करने में लग गए हैं।

किसानों से बात कर रहे हैं भाजपा सांसद, विधायक और पार्षद

एक तरफ जहां केंद्र सरकार किसान संगठनों से चर्चा कर रही है वहीं दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी ने भी नए किसान विधेयक के फायदों को लोगों तक पहुंचाने के लिए मैदान संभाल लिया है। पार्टी ने ‘अन्नदाता के हितों को समर्पित मोदी सरकार’ शीर्षक से हिंदी, अंग्रेजी समेत अन्य भाषाओं में बुकलेट छपवाई है।

सौ पृष्ठों की पुस्तक में विस्तार से बताया गया है कि नए कृषि कानूनों से किस तरह से किसानों को फायदा होगा। किताब में कृषि कानूनों को लेकर उठ रहे सवाल और आशंकाओं के बारे में भी जवाब दिया गया है। पार्टी ने सोशल मीडिया पर भी कैंपेन शुरू कर दिया है। सभी सांसदों, विधायकों और पार्षदों की ड्यूटी भी लगाई गई है कि वे उन किसान संगठनों की सूची तैयार करें जो समर्थन देने के लिए तैयार हैं।

भाजपा के एक वरिष्ठ उपाध्यक्ष ने नाम न छापने के अनुरोध पर अमर उजाला को बताया कि पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा रोज राज्यों में हो रही किसान बैठकों और किसान रैलियों का अपडेट ले रहे हैं। हर शहर में नए कृषि कानूनों के समर्थन में एक से दो किसान रैली आयोजित करने के लिए कहा गया है। भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री, सांसदों, विधायकों को किसानों के बीच जाने और उनसे चर्चा करने के लिए भी कहा गया है। भाजपा किसान मोर्चा भी पूरे देश में किसान संगठनों से चर्चा में जुटा हुआ है।

भाजपा के राष्ट्रीय सचिव और पूर्व सांसद अनुपम हाजरा ने अमर उजाला को बताया कि ब्लॉक स्तर पर कार्यकर्ता सीधे जाकर किसानों से नए कानूनों को लेकर चर्चा कर रहे हैं। पार्टी के हर राज्य के सांसद विधायक और मंत्री भी सप्ताह में तीन से चार दिन अपने क्षेत्र के किसान और उनके संगठनों के साथ बैठक कर रहे हैं। सामान्य भाषा में तैयार की गई पुस्तिका भी लोगों में वितरित की जा रही है। विपक्ष लगातार जिन मुद्दों को लेकर किसानों को भड़का रहा है, ऐसे विषयों पर भी हम किसानों से चर्चा कर रहे हैं। उन्हें बता रहे हैं कि विपक्ष उनका गलत इस्तेमाल कर रहा है।’

26 जनवरी से आरएसएस हर गांवों में संभालेगा मोर्चा  

सरकार और भाजपा का साथ देने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ा संगठन भारतीय किसान संघ भी मैदान में उतर गया है। किसान संघ के कार्यकर्ता 26 जनवरी में देश के हर गांव में किसानों को जागरूक करने का काम शुरु करेंगे। संघ के महामंत्री बद्रीनारायण चौधरी ने अमर उजाला से कहा कि किसान संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में नए किसान कानूनों को लेकर गांवों के किसानों के बीच जाने का फैसला लिया है।

संघ के करीब एक लाख कार्यकर्ता 26 जनवरी को 50 हजार गांव कवर करेंगे और किसानों से बात करेंगे। दो-दो कार्यकर्ता एक-एक ग्राम समितियों में जाकर नए कानूनों को लेकर बताएंगे। ये सभी लोग नए किसान कानूनों को लेकर एक छोटी पुस्तिका भी वितरित करेंगे, जिसमें कानूनों के फायदों के बारें में जानकारी दी गई होगी। इसके अलावा गांव में छोटी-छोटी संगोष्ठी भी आयोजित करेंगे।

चौधरी ने बताया कि केंद्र सरकार ने किसानों की मांगों को लेकर विशेषज्ञों की जो समिति बनाने की बात कही है हम उसका स्वागत करते हैं। सरकार यह सुनिश्चित करे कि किसानों को फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य मिले। जो भी व्यापारी किसानों से सीधे उनके उत्पाद खरीदे वह एमएसपी से कम न हो।

इसके अलावा व्यापारियों के रजिस्ट्रेशन का भी प्रावधान हो। इसके अलावा हमारी मांग है कि सरकार केंद्र या राज्य के स्तर पर पोर्टल तैयार करे और ट्रेडर्स उसमें बैंक की गारंटी के साथ अपना पंजीयन करवाएं। इससे किसान ये देख सकेगा कि जो खरीद करने आया है वह सही है या गलत। इसके साथ साथ ही हर जिले में कृषि अदालत बनाई जाए।

किसानों को थकाने, माहौल बदलने और समर्थन जुटाने में लगी सरकार

आंदोलन की शुरुआत में केंद्र सरकार बैकफुट पर थी, लेकिन अब फ्रंटफुट पर आकर आक्रामक रुख अपना रही है। पीएम नरेंद्र मोदी और सरकार की इमेज को बचाने के लिए केंद्रीय मंत्रियों ने भी मोर्चा संभाला लिया है। सरकार द्वारा इस मुद्दे को किसान बनाम किसान किया जा रहा है। जो लोग आंदोलन कर रहे हैं उन्हें इंतजार कराकर थकाने और उनके सामने कानून का समर्थन करने वालों की बड़ी फौज तैयार की योजना बनाई गई है। इसी दिशा में केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर रोज एक दर्जन से ज्यादा किसान संगठनों से मुलाकात कर रहे हैं।

वहीं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी किसानों के साथ होने वाली हर बैठक पर नजर बनाए हुए हैं। छठवें दौर की बातचीत के बाद से ही सरकार ने माहौल बदलने पर जोर देना शुरू कर दिया है। अधिकांश केंद्रीय मंत्री शहरों में जाकर नए कानूनों को लेकर प्रेसवार्ता कर रहे हैं। सभी मंत्री अपने सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए नए कृषि कानूनों के फायदे बता रहे हैं। कृषि कानूनों के फायदे वाले और माहौल बदलने के लिए अलग-अलग भाषाओं में वीडियो सोशल मीडिया पर जारी किए जा रहे हैं।



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