किसान आंदोलनः सिंघु बॉर्डर शिविर में अब तक निकाले जा चुके हैं 2700 लोगों के दांत

Published by Razak Mohammad on

अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Updated Wed, 13 Jan 2021 05:58 AM IST

सिंघु बॉर्डर के पर दांतों का अस्पताल…
– फोटो : अमर उजाला

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आंदोलन में शामिल किसान और समर्थक, खाली वक्त अपने दांतों की देखभाल में लगा रहे हैं। जब कभी वक्त मिला, सिंघु बॉर्डर पर लगाए गए कैंप में पहुंचकर दवाइयां ले रहे हैं या दांत निकलवा रहे हैं।

हैरानी की बात यह है कि 40 दिनों में इस कैंप में 2700 से अधिक लोगों के दांत निकाले गए हैं ताकि उन्हें तकलीफ से बचाया जा सके। इनमें अधिकतर बुजुर्ग हैं, लेकिन कुछ ऐसे भी मरीज पहुंचे जिनकी उम्र कम होने के बावजूद दांतों की हिफाजत न करने का खामियाजा भुगतना पड़ा।

मोहाली के एक अस्पताल के दंत चिकित्सक डॉ. सनी अहलूवालिया ने बताया कि 28 नवंबर से कैंप शुरू किया गया। यहां पहुंचने वाले अधिकतर मरीजों की उम्र 70 वर्ष से अधिक है। पिछले 40 दिनों में 2700 से अधिक लोगों के दांत निकाले जा चुके हैं।

डॉ. अहलूवालिया ने कहा कि दांत निकलवाने के बाद 12 घंटे तक परहेज जरूरी है। इस दौरान उनके खाने के लिए दो जगह लंगर लगाए गए हैं जहां खिचड़ी और दलिया ले सकते हैं। इसके बाद पहले की तरह की आंदोलन में बढ़ चढ़कर शामिल हो रहे हैं। 

उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि मौसम अधिक सर्द होने की वजह से सुबह के वक्त दांतों में ठंडा गर्म होने की वजह से भी कुछ लोगों को दिक्कत आ रही है। जबकि कुछ ऐसे में लोग हैं जो ब्रश करने से सर्दियों में चूक जाते हैं, इससे दांतों के खराब होने का खतरा और बढ़ जाता है।

इस कैंप में आंदोलन में शामिल किसान और समर्थकों के अलावा आसपास के गांवों के कुछ लोग भी पहुंच रहे हैं, क्योंकि उन्हें न केवल बेहतर सुविधा मिल रही है बल्कि इसके लिए उन्हें खर्च भी नहीं करना पड़ रहा है।

आंदोलन में शामिल किसान और समर्थक, खाली वक्त अपने दांतों की देखभाल में लगा रहे हैं। जब कभी वक्त मिला, सिंघु बॉर्डर पर लगाए गए कैंप में पहुंचकर दवाइयां ले रहे हैं या दांत निकलवा रहे हैं।

हैरानी की बात यह है कि 40 दिनों में इस कैंप में 2700 से अधिक लोगों के दांत निकाले गए हैं ताकि उन्हें तकलीफ से बचाया जा सके। इनमें अधिकतर बुजुर्ग हैं, लेकिन कुछ ऐसे भी मरीज पहुंचे जिनकी उम्र कम होने के बावजूद दांतों की हिफाजत न करने का खामियाजा भुगतना पड़ा।

मोहाली के एक अस्पताल के दंत चिकित्सक डॉ. सनी अहलूवालिया ने बताया कि 28 नवंबर से कैंप शुरू किया गया। यहां पहुंचने वाले अधिकतर मरीजों की उम्र 70 वर्ष से अधिक है। पिछले 40 दिनों में 2700 से अधिक लोगों के दांत निकाले जा चुके हैं।

डॉ. अहलूवालिया ने कहा कि दांत निकलवाने के बाद 12 घंटे तक परहेज जरूरी है। इस दौरान उनके खाने के लिए दो जगह लंगर लगाए गए हैं जहां खिचड़ी और दलिया ले सकते हैं। इसके बाद पहले की तरह की आंदोलन में बढ़ चढ़कर शामिल हो रहे हैं। 

उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि मौसम अधिक सर्द होने की वजह से सुबह के वक्त दांतों में ठंडा गर्म होने की वजह से भी कुछ लोगों को दिक्कत आ रही है। जबकि कुछ ऐसे में लोग हैं जो ब्रश करने से सर्दियों में चूक जाते हैं, इससे दांतों के खराब होने का खतरा और बढ़ जाता है।

इस कैंप में आंदोलन में शामिल किसान और समर्थकों के अलावा आसपास के गांवों के कुछ लोग भी पहुंच रहे हैं, क्योंकि उन्हें न केवल बेहतर सुविधा मिल रही है बल्कि इसके लिए उन्हें खर्च भी नहीं करना पड़ रहा है।

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