कहां जाएं कोरोना के गंभीर रोगी, कांगड़ा जिले में आईसीयू बिस्तर भरा हुआ है

Shimla News


सुनील चड्ढा, अमर उजाला नेटवर्क, धर्मशाला

द्वारा प्रकाशित: अरविंद ठाकुर
Updated Sun, 02 May 2021 02:57 AM IST

कॉलेज कांगड़ा राकेश प्रजापति
– फोटो: अमर उजाला

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ऑक्सीजन बिस्तर और दवाओं के संकट से थोड़ा बहुत उभरने के बाद अब जिला कांगड़ा में इंटेंसिव कैर यूनिट (आईसीयू) बिस्तर का अकाल पड़ गया है। शनिवार को पूरे जिले में गंभीर मरीजों के लिए एक भी आईसीयू बिस्तर नहीं बचा था। टांडा अस्पताल प्रशासन, जिला स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन अब इस गंभीर स्थिति के सामने खुद को बेबस महसूस कर रहा है। वर्तमान में पूरे जिले में कोरोना के गंभीर रोगियों का इलाज करने के लिए सिर्फ 40 आईसीयू बिस्तर हैं। ये बिस्तर सिर्फ टांडा अस्पताल में हैं। इसके अलावा किसी भी अस्पताल में आईसीयू बिस्तर नहीं हैं। निजी अस्पतालों में भी सिर्फ तीन में ही आईसीयू बिस्तर हैं। इनकी संख्या लगभग 12 है।

सूत्रों के अनुसार कम कीमत के कारण ये तीन निजी अस्पताल अपने आईसीयू बिस्तर सरकार को नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि आधे बिस्तर में सिर्फ ऑक्सीजन वाले ही तैयार किए जाते हैं। इसलिए, प्रशासन अब कोरोना के गंभीर रोगियों को लेकर परेशान हो गया है। शनिवार को टांडा अस्पताल में सभी आईसीयू बिस्तर भर गए। सुबह से जब और गंभीर रोगी टांडा अस्पताल भेजे जाने लगे तो सबके हाथ खड़े हो गए। कांगड़ा में रोजाना 500 से ज्यादा लोग कोरोना से भिन्न हो रहे हैं। 10 से ज्यादा रोजाना कोरोना मरीज मर रहे हैं। ऐसे में स्थिति विकराल होती रही है।

टांडा मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ। भानु अवस्थी ने कहा कि अस्पताल में सभी आईसीयू बिस्तर भर चुके हैं, जबकि लोग अभी भी लापरवाही करने से बाज नहीं आ रहे हैं।) सीएमओ कांगड़ा जीडी गुप्ता ने बताया कि विभाग मरीजों की जान बचाने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहा है। कई विकल्प तलाशे जा रहे हैं। राकेश प्रजापति ने कहा कि कांगड़ा जिले में कुल 40 आईसीयू बेड हैं, जो भर गए हैं। इस मुश्किल वक्त में लोगों के सहयोग की बहुत जरूरत है।

ऑक्सीजन वाले बेड की नहीं है किल्लत
ऑक्सीजन वाले बेड की किल्लत अब कांगड़ा जिले में नहीं है। शनिवार तक प्रशासन ने 665 ऑक्सीजन बेड का पूरे जिले में इंतजाम कर लिया था। ऑक्सीजन का भी प्रशासन ने पर्याप्त मात्रा में व्यवस्थाजाम कर लिया है।

लोग हैं कि मान नहीं रहे हैं
लॉ काँगड़ा की मानें तो कई लोग अपनी जान से खिलवाड़ करने को आमादा हैं। शादियों के आयोजक उन्हें अभी भी फोन कर रहे हैं कि आयोजन में मेहमानों की संख्या बढ़ा दो। लोग अभी भी महामारी की शुद्धता को समझ नहीं रहे हैं।

ऑक्सीजन बिस्तर और दवाओं के संकट से थोड़ा बहुत उभरने के बाद अब जिला कांगड़ा में इंटेंसिव कैर यूनिट (आईसीयू) बिस्तर का अकाल पड़ गया है। शनिवार को पूरे जिले में गंभीर मरीजों के लिए एक भी आईसीयू बिस्तर नहीं बचा था। टांडा अस्पताल प्रशासन, जिला स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन अब इस गंभीर स्थिति के सामने खुद को बेबस महसूस कर रहा है। वर्तमान में पूरे जिले में कोरोना के गंभीर रोगियों का इलाज करने के लिए सिर्फ 40 आईसीयू बिस्तर हैं। ये बिस्तर सिर्फ टांडा अस्पताल में हैं। इसके अलावा किसी भी अस्पताल में आईसीयू बिस्तर नहीं हैं। निजी अस्पतालों में भी सिर्फ तीन में ही आईसीयू बिस्तर हैं। इनकी संख्या लगभग 12 है।

सूत्रों के अनुसार कम कीमत के कारण ये तीन निजी अस्पताल अपने आईसीयू बिस्तर सरकार को नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि आधे बिस्तर में सिर्फ ऑक्सीजन वाले ही तैयार किए जाते हैं। इसलिए, प्रशासन अब कोरोना के गंभीर रोगियों को लेकर परेशान हो गया है। शनिवार को टांडा अस्पताल में सभी आईसीयू बिस्तर भर गए। सुबह से जब और गंभीर रोगी टांडा अस्पताल भेजे जाने लगे तो सबके हाथ खड़े हो गए। कांगड़ा में रोजाना 500 से ज्यादा लोग कोरोना से भिन्न हो रहे हैं। 10 से ज्यादा रोजाना कोरोना मरीज मर रहे हैं। ऐसे में स्थिति विकराल होती रही है।

टांडा मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ। भानु अवस्थी ने कहा कि अस्पताल में सभी आईसीयू बिस्तर भर चुके हैं, जबकि लोग अभी भी लापरवाही करने से बाज नहीं आ रहे हैं।) सीएमओ कांगड़ा जीडी गुप्ता ने बताया कि विभाग मरीजों की जान बचाने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहा है। कई विकल्प तलाशे जा रहे हैं। राकेश प्रजापति ने कहा कि कांगड़ा जिले में कुल 40 आईसीयू बेड हैं, जो भर गए हैं। इस मुश्किल वक्त में लोगों के सहयोग की बहुत जरूरत है।

ऑक्सीजन वाले बेड की नहीं है किल्लत

ऑक्सीजन वाले बेड की किल्लत अब कांगड़ा जिले में नहीं है। शनिवार तक प्रशासन ने 665 ऑक्सीजन बेड का पूरे जिले में इंतजाम कर लिया था। ऑक्सीजन का भी प्रशासन ने पर्याप्त मात्रा में व्यवस्थाजाम कर लिया है।

लोग हैं कि मान नहीं रहे हैं

लॉ काँगड़ा की मानें तो कई लोग अपनी जान से खिलवाड़ करने को आमादा हैं। शादियों के आयोजक उन्हें अभी भी फोन कर रहे हैं कि आयोजन में मेहमानों की संख्या बढ़ा दो। लोग अभी भी महामारी की शुद्धता को समझ नहीं रहे हैं।





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