एजेंटों का नेटवर्क तोड़ने के लिए चलेगा खास अभियान, डीजीपी ने की जांच की समीक्षा

Published by Razak Mohammad on

अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
Updated Fri, 08 Jan 2021 05:00 AM IST

डीजीपी संजय कुंडू (फाइल फोटो)
– फोटो : अमर उजाला

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बहुचर्चित फर्जी डिग्री मामले की जांच की हिमाचल प्रदेश पुलिस के डीजीपी संजय कुंडू ने समीक्षा की। बैठक में एसआईटी के सभी पदाधिकारी शामिल हुए। जांच अधिकारियों ने डीजीपी को अब तक की जांच की जानकारी दी। सूत्रों का कहना है कि डीजीपी अब तक की जांच से तो संतुष्ट थे, लेकिन एजेंटों की गिरफ्तारी को लेकर उन्होंने कई निर्देश दिए।

जांच में यह साफ हो गया है कि फर्जी डिग्री का सारा खेल एजेंटों के नेटवर्क की बदौलत होता था। यही एजेंट आगे सब एजेंटों के जरिये डिग्री के खरीदार तलाशते और फिर रकम लेकर उसे विश्वविद्यालय के अलग-अलग खातों में जमा कराते। चूंकि, एजेंट गिरफ्तार होंगे तो जांच के बाद कोर्ट में इस खेल को साबित करने के लिए अधिकारियों के पास साक्ष्य होंगे। ऐसे में अब एजेंटों के नेटवर्क को तोड़ने के लिए पूरी ताकत से काम करने को कहा गया है।

बता दें, अभी तक जांच टीम विश्वविद्यालय के मालिक राज कुमार राणा समेत सात लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। करीब दो दर्जन लोगों को घंटों पूछताछ के बाद छोड़ा गया है। जांच में यह भी पता चला है कि करीब 95 हजार डिग्रियां फर्जी तरीके से बनाकर बेची गईं। इनमें 45 हजार डिग्रियों से संबंधित डिजिटल डाटा भी जांच टीम को मिल गया है। इसका मिलान भी कर लिया गया है। 

खरीदारों पर कार्रवाई को लेकर अलग से होगा काम
डिग्री बेचने वालों के अलावा उन्हें खरीदने वालों को लेकर अब एसआईटी अलग से रणनीति अपनाएगी। विश्वविद्यालय से ऐसे सभी लोगों का पूरा ब्योरा नहीं मिल सका है। ऐसे में एक बार कुल फर्जी डिग्री पता लगने के बाद जांच टीम खरीदने वालों को भी अपनी गिरफ्त में लेना शुरू करेगी। सूत्रों का यह भी कहना है कि 95 हजार लोगों की गिरफ्तारी संभव नहीं है। ऐसे में देश व विदेश में इन फर्जी डिग्रियों के जरिये सरकारी व गैर सरकारी नौकरी करने वालों के इस खेल को खत्म कैसे किया जाए, इसको लेकर अलग से काम किया जा रहा है।

बहुचर्चित फर्जी डिग्री मामले की जांच की हिमाचल प्रदेश पुलिस के डीजीपी संजय कुंडू ने समीक्षा की। बैठक में एसआईटी के सभी पदाधिकारी शामिल हुए। जांच अधिकारियों ने डीजीपी को अब तक की जांच की जानकारी दी। सूत्रों का कहना है कि डीजीपी अब तक की जांच से तो संतुष्ट थे, लेकिन एजेंटों की गिरफ्तारी को लेकर उन्होंने कई निर्देश दिए।

जांच में यह साफ हो गया है कि फर्जी डिग्री का सारा खेल एजेंटों के नेटवर्क की बदौलत होता था। यही एजेंट आगे सब एजेंटों के जरिये डिग्री के खरीदार तलाशते और फिर रकम लेकर उसे विश्वविद्यालय के अलग-अलग खातों में जमा कराते। चूंकि, एजेंट गिरफ्तार होंगे तो जांच के बाद कोर्ट में इस खेल को साबित करने के लिए अधिकारियों के पास साक्ष्य होंगे। ऐसे में अब एजेंटों के नेटवर्क को तोड़ने के लिए पूरी ताकत से काम करने को कहा गया है।

बता दें, अभी तक जांच टीम विश्वविद्यालय के मालिक राज कुमार राणा समेत सात लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। करीब दो दर्जन लोगों को घंटों पूछताछ के बाद छोड़ा गया है। जांच में यह भी पता चला है कि करीब 95 हजार डिग्रियां फर्जी तरीके से बनाकर बेची गईं। इनमें 45 हजार डिग्रियों से संबंधित डिजिटल डाटा भी जांच टीम को मिल गया है। इसका मिलान भी कर लिया गया है। 

खरीदारों पर कार्रवाई को लेकर अलग से होगा काम

डिग्री बेचने वालों के अलावा उन्हें खरीदने वालों को लेकर अब एसआईटी अलग से रणनीति अपनाएगी। विश्वविद्यालय से ऐसे सभी लोगों का पूरा ब्योरा नहीं मिल सका है। ऐसे में एक बार कुल फर्जी डिग्री पता लगने के बाद जांच टीम खरीदने वालों को भी अपनी गिरफ्त में लेना शुरू करेगी। सूत्रों का यह भी कहना है कि 95 हजार लोगों की गिरफ्तारी संभव नहीं है। ऐसे में देश व विदेश में इन फर्जी डिग्रियों के जरिये सरकारी व गैर सरकारी नौकरी करने वालों के इस खेल को खत्म कैसे किया जाए, इसको लेकर अलग से काम किया जा रहा है।

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