एक्सक्लूसिव: सरकारी अस्पतालों में बेड की कमी, निजी में ऑक्सीजन की किल्लत, कीमत भी बढ़ी

Published by Razak Mohammad on

वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़

Updated Wed, 16 Sep 2020 05:32 AM IST

ऑक्सीजन सिलेंडर।
– फोटो : अमर उजाला

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कोरोना संक्रमण में तेजी के बीच ऑक्सीजन की जरूरत वाले मरीजों की बढ़ती संख्या स्वास्थ्य विभाग के साथ ही निजी अस्पतालों के लिए भी परेशानी का सबब बनती जा रही है। कारण, सरकारी अस्पतालों में जहां बेड की कमी हो रही है, वहीं निजी अस्पताल ऑक्सीजन की कमी से जूझ रहे हैं। 

स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि ऑक्सीजन की मांग पहले की अपेक्षा 70% तक ज्यादा बढ़ गई है। ऐसे में एक तरफ आपूर्तिकर्ता जहां ऑक्सीजन की आपूर्ति करने में लेटलतीफी कर रहे हैं, वहीं कीमत भी बढ़ा दी गई है। इससे अस्पताल प्रबंधन के साथ ही मरीज और उनके परिजन भी परेशान हैं। इस समस्या को लेकर आईएमए के पदाधिकारियों ने प्रशासन से मिलकर ऑक्सीजन की बढ़ती कीमत पर अंकुश लगाने की मांग की है।  

  

बता दें कि कोरोना महामारी के दौरान पिछले डेढ़ महीने से ऑक्सीजन की सप्लाई अचानक तेजी से बढ़ गई है। मोहाली स्थित हाईटेक इंडस्ट्री के अमित ने बताया कि डेढ़ महीने से ऑक्सीजन की सप्लाई बढ़ने के साथ ही उसकी सप्लाई बाधित हो रही है। पहले कोलकाता, औरंगाबाद और दिल्ली से तय समय पर उसकी सप्लाई हो जाती थी लेकिन उन जगहों पर भी मरीजों की तेजी से बढ़ती संख्या के कारण डिमांड समय पर पूरी नहीं हो पा रही है। इसके अलावा घर पर भी मरीजों के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर की डिमांड काफी संख्या में की जा रही है। स्टॉक न होने से सप्लाई समय पर करने में समस्या हो रही है। इसके कारण निजी अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी हो रही है। 

अचानक से बढ़ी ऑक्सीजन की डिमांड के कारण इसकी कीमत भी बढ़ा दी गई है। अब कंपनियां छोटे सिलेंडर की कीमतों में 60 से 80 रुपये तक का इजाफा कर दिया है। पहले जो सिलेंडर 180 रुपये का मिलता था, अब वह 240 से 260 रुपये में मिल रहा है। उसके लिए भी काफी इंतजार करना पड़ रहा है। बढ़ी कीमत को लेकर कंपनियों का कहना है कि सप्लाई बाधित होने के कारण रेट बढ़ाना पड़ रहा है क्योंकि उनके पास भी स्टॉक काफी कम रह गए हैं।   

सरकारी अस्पतालों में स्थिति ठीक

निजी अस्पतालों की तुलना में सरकारी अस्पतालों की स्थिति काफी ठीक है। इसका कारण उनके यहां ऑक्सीजन प्लांट का होना है। पीजीआई हो या जीएमसीएच 32 और जीएमएसएच 16 सभी अस्पतालों में ऑक्सीजन का स्टॉक काफी मात्रा में है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि ओपीडी बंद होने के कारण उनके यहां ऑक्सीजन की खपत काफी कम हो गई है। इस कारण कोरोना काल में भी उन्हें ऑक्सीजन की कमी नहीं हो रही है।  

सार

  • आईएमए के पदाधिकारियों ने प्रशासन से बढ़ी कीमतों पर लगाम लगाने की मांग की  
  • कोरोना के कारण अचानक 70 प्रतिशत तक बढ़ी मांग, एजेंसियों से सप्लाई हुई बाधित

विस्तार

कोरोना संक्रमण में तेजी के बीच ऑक्सीजन की जरूरत वाले मरीजों की बढ़ती संख्या स्वास्थ्य विभाग के साथ ही निजी अस्पतालों के लिए भी परेशानी का सबब बनती जा रही है। कारण, सरकारी अस्पतालों में जहां बेड की कमी हो रही है, वहीं निजी अस्पताल ऑक्सीजन की कमी से जूझ रहे हैं। 

स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि ऑक्सीजन की मांग पहले की अपेक्षा 70% तक ज्यादा बढ़ गई है। ऐसे में एक तरफ आपूर्तिकर्ता जहां ऑक्सीजन की आपूर्ति करने में लेटलतीफी कर रहे हैं, वहीं कीमत भी बढ़ा दी गई है। इससे अस्पताल प्रबंधन के साथ ही मरीज और उनके परिजन भी परेशान हैं। इस समस्या को लेकर आईएमए के पदाधिकारियों ने प्रशासन से मिलकर ऑक्सीजन की बढ़ती कीमत पर अंकुश लगाने की मांग की है।  

  

बता दें कि कोरोना महामारी के दौरान पिछले डेढ़ महीने से ऑक्सीजन की सप्लाई अचानक तेजी से बढ़ गई है। मोहाली स्थित हाईटेक इंडस्ट्री के अमित ने बताया कि डेढ़ महीने से ऑक्सीजन की सप्लाई बढ़ने के साथ ही उसकी सप्लाई बाधित हो रही है। पहले कोलकाता, औरंगाबाद और दिल्ली से तय समय पर उसकी सप्लाई हो जाती थी लेकिन उन जगहों पर भी मरीजों की तेजी से बढ़ती संख्या के कारण डिमांड समय पर पूरी नहीं हो पा रही है। इसके अलावा घर पर भी मरीजों के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर की डिमांड काफी संख्या में की जा रही है। स्टॉक न होने से सप्लाई समय पर करने में समस्या हो रही है। इसके कारण निजी अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी हो रही है। 


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80 से 100 रुपये तक बढ़ी कीमत  

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