अब व्यावसायिक संपत्ति के लिए एनओसी की जरूरत नहीं, रजिस्ट्री के लिए नहीं काटने पड़ेंगे चक्कर

Published by Razak Mohammad on

नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट
– फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर

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अगर आप पंजाब के जीरकपुर में कोई दुकान, शोरूम या अन्य व्यावसायिक संपत्ति खरीद रहे हैं, तो अब इसकी रजिस्ट्री अपने नाम करवाने के लिए आपको नगर परिषद से ‘नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ (एनओसी) लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

यह बड़ा बदलाव स्थानीय सब-तहसील के उच्चाधिकारियों ने शहर निवासियों की परेशानियों को देखते हुए किया है। अब लोगों को व्यावसायिक संपत्ति की रजिस्ट्री के लिए नगर परिषद के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। इसके बिना ही रजिस्ट्री करवाई जा सकेगी। 

स्थानीय सब-तहसील के नायब तहसीलदार पुनीत बंसल ने बताया कि इस फैसले से प्रॉपर्टी बाजार में लंबे समय से चल रही मंदी से भी राहत मिलेगी। जानकारी के मुताबिक ट्राईसिटी की सीमाओं से सटे जीरकपुर शहर में प्रॉपर्टी के क्षेत्र में पिछले कुछ साल में बढ़ोतरी हुई है। 

इसका असर यह हुआ है कि इस छोटे से शहर की आबादी अब 4 लाख से अधिक हो चुकी है। लोग चंडीगढ़ और पंचकूला में संपत्ति खरीदने के बजाय जीरकपुर में खरीदना ज्यादा पसंद करते हैं। बता दें कि अन्य शहरों के मुकाबले यहां प्रॉपर्टी के दाम कम हैं। इसी वजह से लोग यहां मकान के साथ-साथ दुकानें या अन्य व्यावसायिक संपत्ति भी खरीद रहे हैं। 

व्यावसायिक संपत्ति खरीदने के लिए पड़ती थी एनओसी की जरूरत
दूसरे राज्यों से जीरकपुर में आकर लोग यहां दो तरह की प्रॉपर्टी में निवेश करते थे। रिहायशी और व्यावसायिक संपत्ति में। इसमें रिहायशी संपत्ति को अपने नाम करवाने में व्यक्ति को नगर परिषद से ‘एनओसी’ की जरूरत नहीं पड़ती थी, लेकिन व्यावसायिक संपत्ति को अपने नाम करवाने के लिए लोगों को नगर परिषद कार्यालय से ‘नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ की जरूरत पड़ती है। इसके चलते लोग व्यावसायिक संपत्ति खरीदने से भी कतराते थे। जो लोग संपत्ति खरीदते थे उन्हें नगर परिषद कार्यालय में अधिकारियों के पास एनओसी लेने के लिए कई चक्कर काटने पड़ते थे। 

मंदी से उबरेगा रियल एस्टेट बाजार

राजस्व विभाग की ओर से व्यावसायिक संपत्ति की रजिस्ट्री अपने नाम करवाने के लिए ‘एनओसी’ की जरूरत को खत्म करने के फैसले का बिल्डर लॉबी स्वागत करती है। विभाग के उच्चाधिकारियों की ओर से लिए गए इस फैसले से लंबे समय से चली आ रही मंदी से प्रापर्टी बाजार को राहत मिलेगी। – हरीश गुप्ता, अध्यक्ष, बिल्डर एसोसिएशन, जीरकपुर।

पूरी हुई प्रॉपर्टी डीलर्स एसोसिएशन की मांग
प्रॉपर्टी बाजार से जुड़े लोगों की परेशानी को देखते हुए प्रॉपर्टी डीलर्स एसोसिएशन लंबे समय से राजस्व विभाग से व्यावसायिक संपत्ति की रजिस्ट्री के लिए ‘एनओसी’ को हटाने की मांग कर रही थी, जो अब जाकर पूरी हुई है। पहले लोगों को एनओसी लेने के लिए नगर परिषद कार्यालय में कई चक्कर काटने पड़ते थे, लेकिन अब फैसला लागू होने के बाद लोगों को सहूलियत होगी। – गुलशन अरोड़ा, अध्यक्ष, बलटाना प्रॉपर्टी डीलर एसोसिएशन।

विभाग के उच्चाधिकारियों ने दी मंजूरी 
रिहायशी संपत्ति की तरह अब व्यावसायिक संपत्ति की रजिस्ट्री अपने नाम करवाने के लिए लोगों को नगर परिषद से ‘नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ लेने की जरूरत नहीं है। अब इसके बिना ही लोग व्यावसायिक संपत्ति को अपने नाम करवा सकेंगे। यह फैसला विभाग के उच्चाधिकारियों की मंजूरी के बाद लागू किया गया है। – पुनीत बंसल, नायब तहसीलदार, सब-तहसील, जीरकपुर।

अगर आप पंजाब के जीरकपुर में कोई दुकान, शोरूम या अन्य व्यावसायिक संपत्ति खरीद रहे हैं, तो अब इसकी रजिस्ट्री अपने नाम करवाने के लिए आपको नगर परिषद से ‘नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ (एनओसी) लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

यह बड़ा बदलाव स्थानीय सब-तहसील के उच्चाधिकारियों ने शहर निवासियों की परेशानियों को देखते हुए किया है। अब लोगों को व्यावसायिक संपत्ति की रजिस्ट्री के लिए नगर परिषद के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। इसके बिना ही रजिस्ट्री करवाई जा सकेगी। 

स्थानीय सब-तहसील के नायब तहसीलदार पुनीत बंसल ने बताया कि इस फैसले से प्रॉपर्टी बाजार में लंबे समय से चल रही मंदी से भी राहत मिलेगी। जानकारी के मुताबिक ट्राईसिटी की सीमाओं से सटे जीरकपुर शहर में प्रॉपर्टी के क्षेत्र में पिछले कुछ साल में बढ़ोतरी हुई है। 

इसका असर यह हुआ है कि इस छोटे से शहर की आबादी अब 4 लाख से अधिक हो चुकी है। लोग चंडीगढ़ और पंचकूला में संपत्ति खरीदने के बजाय जीरकपुर में खरीदना ज्यादा पसंद करते हैं। बता दें कि अन्य शहरों के मुकाबले यहां प्रॉपर्टी के दाम कम हैं। इसी वजह से लोग यहां मकान के साथ-साथ दुकानें या अन्य व्यावसायिक संपत्ति भी खरीद रहे हैं। 

व्यावसायिक संपत्ति खरीदने के लिए पड़ती थी एनओसी की जरूरत

दूसरे राज्यों से जीरकपुर में आकर लोग यहां दो तरह की प्रॉपर्टी में निवेश करते थे। रिहायशी और व्यावसायिक संपत्ति में। इसमें रिहायशी संपत्ति को अपने नाम करवाने में व्यक्ति को नगर परिषद से ‘एनओसी’ की जरूरत नहीं पड़ती थी, लेकिन व्यावसायिक संपत्ति को अपने नाम करवाने के लिए लोगों को नगर परिषद कार्यालय से ‘नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ की जरूरत पड़ती है। इसके चलते लोग व्यावसायिक संपत्ति खरीदने से भी कतराते थे। जो लोग संपत्ति खरीदते थे उन्हें नगर परिषद कार्यालय में अधिकारियों के पास एनओसी लेने के लिए कई चक्कर काटने पड़ते थे। 

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